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ॐ समस्त ध्वनियों का सार है |
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सभी छंदों में छिपी हुई आत्मा है - ॐ |
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जहाँ भी गीत है वहां है - ॐ |
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जहाँ भी वाणी है वहां है - ॐ |
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जन्म - जन्म के शुभ कर्मो का |
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होता जब तक मेल नहीं | |
ॐ से ही जगत की उत्पत्ति हुई है |
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नर तन के चोले का पाना, |
ॐ में ही जगत का विसर्जन होता है |
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बच्चों का कोई खेल नहीं | |
जो प्रारंभ में है वहीं अंत में है |
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आनंद संतुलन में है | संतुलन साधना में है | |
ॐ कार से दूर निकल जाना नर्क है | |
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जीवन को जितना साधेंगें उतना ही यह संतुलित |
ॐ कार के करीब आ जाना स्वर्ग है | |
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और दिव्य होता जायेगा | |
ॐ कार के साथ एक हो जाना मोक्ष है | |
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अन्धकार में ही प्रकाश छिपा है | |
मनुष्य प्रकृति का सर्वश्रेठ जीव है | |
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इसे खोजने का नाम आनंद है | |
यह फिर भी सबसे अधिक दुखी है | |
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इसे तो आनंदित होना चाहिए | |
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| आनंदमय जीवन मनुष्य का अधिकार है | |